रविवार, 10 जून 2012

जानिये हमारे मूल अधिकारों को .


हमारे संविधान ने नागरिको के लिए कुछ मूल अधिकार प्रदान  किये है , जो संविधान के अनुच्छेद १२ से  35 के अंतर्गत है (भाग- ३ )
परिभाषा - मूल अधिकार वे अधिकार होते है , जिन्हें राज्य द्वारा अपने नागरिको को जीवन जीने और अपने व्यक्तिव्य के सम्पूर्ण विकास हेतु प्रदान किये जाते है . ये राज्य के लिए अनिवार्य होते है . यदि किसी नागरिक को ये अधिकार प्राप्त नही होते है , तो वह न्यायलय की शरण में जा सकता है . भारत में संविधान ने सर्वोच्च न्यायलय को मूल या मौलिक अधिकारों का संरक्षक घोषित किया है .  
हमारे मूल अधिकार निम्न लिखित है - 
अनुच्छेद - १२ - मूल अधिकारों की परिभाषा 
अनु०- १३- मूल अधिकारों हेतु विधियाँ 
अनु० - १४- विधि के समक्ष समता - सभी नागरिक विधि (कानून ) के समक्ष सामान होगा . 
अनु०- १५ - धर्म, मूलवंश, जाति या जन्म स्थान के आधार पर विभेद का प्रतिषेध 
अनु०  -१६- लोक नियोजन  के विषय में अवसर की समता 
अनु०-१७- अस्पृश्यता (छुआछूत ) का अंत 
अनु०- १८ - उपाधियो का अंत (सेना और शिक्षा क्षेत्र को छोड़कर)
अनु० १९ वाक् एवं  स्वतंत्रता का अधिकार - सभी नागरिको को :- 
           (a) वाक्   एवं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रतता का ,(इसी में प्रेस की स्वतंत्रतता समाहित है )
           (b) शांतिपूर्वक और निरायुध (बिना हथियार के ) सम्मलेन का ,
           (c) संगम  या संघ बनाने का,
           (d) भारत के राज्य क्षेत्र में सर्वत्र अबाध संचरण (घुमने ) का ,
           (e)भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भी भाग में निवास करने और बसने का और 
           (f) *
           (g) कोई भी वृत्ति (पेशा ), उपजीविका, व्यापार या कारोबार  करने का , अधिकार होगा
 * संपत्ति का अधिकार ४६वे संविधान संशोधन के द्वारा हटाया गया.
अनु० २० - अपराधो के लिए दोष सिद्धि के सम्बन्ध में संरक्षण - 
          (a) किसी व्यक्ति को एक ही अपराध के लिए एक बार से अधिक दण्डित नहीं  किया जायेगा .
           (b)किसी अपराध के लिए  किसी व्यक्ति को स्वयं अपने  विरुद्ध गवाही देने को बाध्य नही किया          जायेगा 
अनु० २१ - प्राण एवं दैहिक स्वतंत्रता का अधिकार 
         २१ (क ) शिक्षा का अधिकार 
अनु० 22 - कुछ दशाओ में गिरफ़्तारी और निरोध से संरक्षण -
             - बिना कारण बताये गिरफ्तार नही किया जायेगा   
             - गिरफ्तार व्यक्ति को २४ घंटे में निकटतम मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा 
अनु० २३- मानव के दुर्व्यवहार और बलात श्रम का निषेध 
अनु० २४- कारखानों आदि में बालको (१४ वर्ष से कम उम्र के ) के नियोजन का प्रतिबन्ध 
अनु० २५ - किसी भी धर्म को मानने , आचरण और प्रचार करने की स्वतंत्रता 
अनु० २६- धार्मिक कार्यो के प्रबंध की स्वतंत्रता 
अनु०- २७ -  किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करो के संदाय(छुट ) के बारे में स्वतंत्रता 
अनु० २८- कुछ शिक्षा संस्था  में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना के बारे में  
अनु० २९- धार्मिक कार्यो में प्रबंध की स्वतंत्रता 
अनु०- ३०- शिक्ष संतानो की स्थापना  और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक वर्गों का अधिकार 
अनु० ३१- * संपत्ति का अधिकार ( १९७८ में निरस्त हो गया है  )  
अनु० ३२- संवैधानिक उपचारों का अधिकार - 
( इसे डॉ. आंबेडकर ने संविधान की आत्मा कहा था ) 
इसमें सर्वोच्च न्यायलय को मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए पांच प्रकार  की रिट जरी करने की शक्ति दी गयी है . 
बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार प्रच्छा  और उत्प्रेषण 
अनु ० ३३, ३४ और ३५ संसद और सैनिको  से  सम्बंधित है .
 

7 टिप्‍पणियां:

  1. Ap bahut hi achha kam kr rahe hai. Ve log jo coaching nhi kr skte unke liye yeh blog very important hai.

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  2. Kripya ye btaye ki apke post ko sms se kese join kia jaye. Qki kabhi kabhi net pack khatam ho jata hai to sms se hme pta chal jayega ki apne kon sa topic post kia.

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    1. मनमोहन जी , शुक्रिया ! एस एम् एस प्रक्रिया का तो मुझे भी नही पता है . मैं किसी विशेषज्ञ से पता करके बताने की कोशिश करूँगा . आप तब तक समर्थक बनके अपने इ-मेल के माध्यम से यह तक पहुच सकते है .

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  3. संक्षिप्त और सुन्दर प्रस्तुति ,ज्ञान वर्धक .

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  4. बड़ा समय पर ये पोस्ट लगाया है। आज कल इनकी चर्चा ज़ोरों पर है। और ये तथ्य काम के हैं।

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  5. मुझे बहुत अच्छा लगा धन्यवाद।

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