मंगलवार, 24 जुलाई 2012

अलंकार और उसके भेद ( भाग - 2 )

 पिछली बार हमने अलंकार और उसके प्रकारों के बारे में पढ़ा  था . शब्द अलंकार के प्रकारों को समझा था. इस   बार हम  अर्थ अलंकार  और उसके भेद को जानेंगे . 
उपमा अलंकार 
परिभाषा - जहाँ दो वस्तुओ अथवा व्यक्तियों  के रूप में या धर्म अथवा प्रभाव की दृष्टि सदृश्य (समानता ) वर्णित हो वहां उपमा अलंकार होता है . इसमें तुलना की जाती है .
 जैसे - राधा चन्द्र सी सुन्दर है
उपमा के अंग - 
१- उपमेय (प्रस्तुत ) - जिसके लिए उपमा दी जाती है , या जिसकी तुलना की जाती है .
२- उपमान (अप्रस्तुत )- जिससे उपमा दी जाती है , या जिससे तुलना की जाती है . 
३- वाचक शब्द - वह शब्द , जिसके द्वारा समानता प्रदर्शित  की जाती है . जैसे - ज्यों , जैसे , सम , सरिस , सामान आदि 
४- समान धर्म - वह गुण अथवा क्रिया , जो उपमेय और उपमान , दोनों में पाया जाता है . अर्थात जिसके कारन इन दोनों को समान बताया जाता है .   
जैसे - राधा      चन्द्र          सी             सुन्दर
            |              |              |                  |
      उपमेय     उपमान  वाचक शब्द     समान धर्म 
उपमा के दो भेद होते है -  
१- पूर्ण उपमा  - जब उपमा में इसके चारो अंग हो . 
          जैसे - मुख चन्द्रमा के समान सुन्दर है . 
२- लुप्तोपमा  -  जब उपमा के चारो अंगो में से कोई एक या अधिक  अंग लुप्त हो 
                   मुख चन्द्रमा के समान ...........  है . (यहाँ  समान धर्म  लुप्त है ) 
प्रतीप अलंकार 
 यह उपमा का उल्टा होता है . अर्थात जब उपमेय को उपमान और उपमान को उपमेय बना दिया जाता है , तो वहां प्रतीप अलंकार होता है . 
जैसे - चन्द्रमा मुख के सामान सुन्दर है . 
रूपक अलंकार  
जहाँ उपमेय को  उपमान में ही आरोपित कर दिया जाये , वहां रूपक अलंकार होता है . 
जैसे - मुख चन्द्रमा है . 
        ( यहाँ मुख पर "चन्द्रमा " का आरोप किया गया है )
उत्प्रेक्षा अलंकार 
जब उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाती है , तब उत्प्रेक्षा  अलंकार होता है  .
लक्षण - मनु, जनु, मनो , मानहु , मानो, जानहु आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है . 
जैसे - मुख मानो चन्द्र है . 
संदेह अलंकार 
जब उपमेय में उपमान का संदेह हो , तब संदेह अलंकार होता है . 
 जैसे -  यह मुख है या चन्द्र है . 
भ्रांतिमान अलंकार 
जब भ्रमवश उपमेय को उपमान समझ लिया जाता है , तो भ्रांतिमान अलंकार होता है . 
जैसे - मुन्ना  तब मम्मी के सिर  पर देख-देख दो चोटी
         भाग उठा भय मानकर , सिर पर सांपिन लोटी 
     
अतिश्योक्ति अलंकार 
जब किसी की अत्यंत प्रशंसा के लिए कोई बात बहुत बढ़ा चढ़ा कर अथवा लोक सीमा का उल्लंघन करके कहा जाये , तो वहां अतिश्योक्ति अलंकार होता है . 
जैसे - हनुमान की पूंछ में लगन न पाई आग 
          लंका सबरी जल गयी , गये निशाचर भाग  
विभावना अलंकार 
जब किसी कार्य- कारन के सम्बन्ध में कोई विलक्षण बात कही जाती है , तब वहां विभावना अलंकार होता है . 
जैसे - बिनु पद चले , सुने बिनु काना 
व्यतिरेक अलंकार 
जब उपमेय को उपमान की अपेक्षा बढ़कर बताया जाये तो व्यतिरेक अलंकार होता है .
जैसे - साधू ऊँचे शैल सम , किन्तु पृकृति  सुकुमार 
अनन्वय अलंकार 
जब उपमेय का कोई उपमान न होने के कारन उपमेय को ही उपमान बना दिया जाता है , तब उसे अनन्वय अलंकार होता है . 
जैसे - मुख मुख ही के सामान सुन्दर है .
 
 







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