रविवार, 8 जुलाई 2012

सामान्य हिंदी : अलंकार परिचय

आजकल प्रतियोगी परीक्षाओ में सफलता के लिए सामान्य हिंदी एक महत्पूर्ण कारक की भूमिका निभा रहा है . अक्सर प्रतियोगी हिंदी को सरल समझ कर ज्यादा ध्यान नही देते , जो असफलता का एक कारण हो सकता है . हिंदी के महत्त्व को देखते हुए  परीक्षोपयोगी महत्वपूर्ण अलंकारो का वर्णन  किया जा रहा है . 
परिभाषा - काव्य की शोभा बढ़ाने वाले शब्दों को अलंकार कहते है . 
अलंकार शब्द का शाब्दिक अर्थ होता है - आभूषण

अलंकार मुख्यतः दो प्रकार के होते है -
१- शब्दालंकार 
२- अर्थान्लंकर 
 ( कहीं कहीं अलंकार का तीसरा प्रकार  उभयालंकार  भी मिलता है )
१- शब्दालंकार - जहाँ काव्य में शब्दों के कारण चमत्कार आ जाता है , वहां शब्दालंकार होता है .  
 शब्दालंकार के कुछ प्रमुख भेद है -
अनुप्रास शब्दालंकार - वर्णों (अक्षरों ) की आवृत्ति को अनुप्रास कहते है . किसी वर्ण का एक से अधिक बार आना आवृत्ति है . 
     "स्वर का सम्मलेन जहाँ , चाहे  होय न होय 
      व्यंजन की समता मिले , अनुप्रास है सोय . " 
उदहारण - 
१- चारू चन्द्र की चंचल किरणे , खेल रही है , जल थल  में 
 (च और ल वर्ण की आवृत्ति )
२- तरनी तनूजा तट- तमाल तरुवर बहु छाये 
(त वर्ण की आवृत्ति )
३- सुन सिय सत्य असीस हमारी 
( स वर्ण की आवृत्ति ) 
४-  मुदित महीपति मंदिर आये , सेवक सचिव सुमंत बुलाये 
  ( म और स वर्ण की आवृत्ति ) 

यमक शब्दालंकार - यमक का शाब्दिक अर्थ है जुड़वाँ या दो . इस अलंकार में एक बार- बार आये लेकिन उसका अर्थ बदल जाये . 
"एक ही शब्द फिर फिर जहाँ परे अनेकन बार 
    अर्थ और ही और हो सो यमकलंकर  "
उदहारण - 
१- कनक- कनक ते सौ गुनी मादकता अधिकाय
  या    खाए    बौराय   जग , वा पाए   बौराय .  
( पहले कनक का अर्थ धतूरा , और दुसरे कनक का अर्थ सोना है )
२-  जे तीन बेर खाती थी , वे तीन बेर खाती है .
( तीन बेर - तीन बार और तीन बार - तीन बेर के फल )
३- लहर लहर कर यदि चूमे तो  , 
   किंचित विचलित न होना 
(लहर- तरंग , लहर - मचलना ) 
श्लेष शब्दालंकार - श्लेष शब्द का अर्थ है ,  चिपका हुआ. जहाँ एक शब्द से अनेक अर्थ चिपके हुए हो . 
प्रगट अनेकन अर्थ जहँ, एक शब्द से होय 
ताहि कहत है श्लेष कवि, द्वै विधि होवे सोय 
 उदहारण -     - 
१- जो रहीम गति दीप की , कुल कपूत गति सोय 
बारै उजियारो करै , बढे अँधेरा होय 
(बारै  - बचपन में , जलाने पर : बढे - बड़ा होने पर , बुझने पर )
२- रहिमन पानी रखिये , बिन पानी सब सून 
  पानी गये न ऊबरे , मोती , मानुस  चून
( पानी - चमक , सम्मान  और जल ) 
२- अर्थालंकार - जब शब्दों के अर्थ से चमत्कार स्पष्ट हो तो वहां अर्थालंकार होता है . 
 उपमा  - जहँ एक वस्तु अथवा प्राणी की तुलना अत्यंत सादृश्य के कारण किसी प्रसिद्द वस्तु या प्राणी से की जाये , वहां उपमा अलंकार होता है . 
उदहारण -
१-           सिन्धु- सा विस्तृत है अथाह 
               एक निर्वासित का उत्साह  
(यहाँ "उत्साह " की "सिन्धु " से तुलना की गयी है
२ - सीता का मुख चन्द्रमा के सामान सुन्दर है 
उपमा के अंग - 
I . उपमेय - जिसके लिए उपमा दी जाये ( जैसे - सीता )
II . उपमान - जिससे उपमा दी जाती है   (जैसे - चन्द्रमा)
III .वाचक शब्द - जिस शब्द के द्वारा समानता बताई जाई . (जैसे - सामान )
IV . सामान धर्म - वह गुण या क्रिया  , जो उपमेय और उपमान में एक सामान हो   ( जैसे - सुन्दरता  )
क्रमशः -

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत अच्छी और उपयोगी श्रृंखला है यह।

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  2. सीमित उदाहरण ही सर्वत्र दिखने के कारण मुझे यह अध्याय बड़ा जटिल लगता है। पाठ्यपुस्तकों में, एक-एक अलंकार को कई-कई उदाहरणों से समझाया जाना चाहिए।

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  3. यमक अलंकार - काली घटा का घमंड घटा |

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