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बुधवार, 22 फ़रवरी 2012

पटवारी परीक्षा की तैयारी कैसे करे !


हाल ही में मध्य प्रदेश में राजस्व बिभाग के अंतर्गत पटवारी परीक्षा हेतु विज्ञप्ति जारी की गयी है । इस परीक्षा की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता ये है , कि यह परीक्षा ऑनलाइन होनी है । यह मध्य प्रदेश शासन कि पहली परीक्षा होगी जिसमे ऑनलाइन परीक्षा हो रही है । ऐसा इसलिए हो रहा है , क्योंकि पिछली पटवारी परीक्षा में बहुत अधिक धांधली होने की शिकायत मिली थी । अधिकाश परीक्षार्थियों के पास कंप्यूटर के डिप्लोमा नही थे । मगर इस बार ऑनलाइन परीक्षा होने से इस तरह के परीक्षार्थी स्वमेव ही अलग हो जायेंगे ।
भू अभिलेख एवं बंदोबस्त कार्यालय द्वारा इस परीक्षा का सिलेबस इस प्रकार दिया गया है :-
१- सामान्य ज्ञान २- सामान्य गणित एवं सामान्य अभिरुचि ३- सामान्य हिंदी ४- सामाजिक व्यवस्था ५- ग्रामीण अर्थव्यवस्था एवं पंचायती राज ६- कंप्यूटर दक्षता
अब ध्यान देने वाली बात ये है कि देखने में ये सिलेबस भले ही छोटा लगे मगर ये है बहुत बड़ा है , क्योंकि
१- सामान्य ज्ञान - इसके अंतर्गत
भारतीय इतिहास (प्राचीन, मध्यकालीन , आधुनिक ),
भूगोल (खगोलकी, विश्व एवं भारत का ),
अर्थशास्त्र (विश्व एवं भारत का ),
सामान्य विज्ञान ( जीव विज्ञान , रसायन , भौतिकी, वनस्पति विज्ञान , जंतु विज्ञान, पर्यावरण आदि )
समसामयिकी ( पिछले एक वर्ष की गतिविधिया )
खेल जगत ( प्रतियोगिताये , मैदान , नियम , खिलाडी , परिणाम आदि )
विविध ( विश्व एवं भारत में प्रथम , पुरष्कार एवं सम्मान, छोटा-बड़ा, ऊँचा-नीचा , संगठन-मुख्यालय , दिवस आदि )
इसी तरह सामान्य गणित एवं सामान्य अभियोग्य्ताओ के अंतर्गत-
सरलीकरण, संख्या पध्दति, भिन्न, लघुत्तम-महत्तम समापवर्तक, घातांक, प्रतिशत , लाभ -हानि , साधारण व्याज , चक्रवार्द्धि व्याज, औसत, अनुपात एवं समानुपात, साझेदारी, मिश्रण, समय एवं काम , नल और टंकी , समय-चाल और दूरी , क्षेत्र मिति
त्रिकोणमिति , ज्यामिति, वीज्गानित, क्रमचय-संचय, प्रायिकता , अनुक्रम , घडी , केलेंडर, सांख्यिकी, बट्टा, जोड़-घटाव, गुणा-भाग आदि

सामान्य हिंदी में
वर्णमाला, संज्ञा, सर्वनाम , क्रिया, विशेषण , काल , वचन , लिंग , वाक्य रचना, संधि, समास , छंद , रस, अलंकार , काव्य , काव्य के प्रकार , शब्द शक्ति , मुहावरे-लोकोक्तियाँ ,पर्यायवाची शब्द, समानार्थी शब्द , विलोम शब्द, अनेकार्थ शब्द , अनेक शब्दों के एक शब्द ,साहित्यिक रचनाये एवं काल आदि
इस तरह देखा जाये तो छोटा दिखने वाला ये सिलेबस बहुत बड़ा हो जाता है , और इसकी तैयारी के लिए मात्र एक माह का समय मिला है , जो कि बहुत कम है । अतः अब परीक्षार्थियों को बहुत सही ध्यान से चय्नाताम्क तरीके से अधिक परिश्रम करना होगा । क्योंकि अगर परीक्षार्थी पूरा सिलेबस पढने कि कोशिश करते है , तो असंभव है । सबसे सही तरीका चयनात्मक पढाई होगी । इसके लिए सही और सार्थक मार्दर्शन कि जरुरत होगी ।

बुधवार, 15 फ़रवरी 2012

भारतीय संविधान का विकास

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1-

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2-

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3-

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4-

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5-

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6-

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7-

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8-

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9-

1892 bZ- dk Hkkjr 'kklu vf/kfu;e & vizR;{k fuokZpu iz.kkyh] iz'u iwNus dh 'kfDr

10-

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11-

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12-

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Ø 1946 bZ- dsfcusV fe'ku & LVhQMZ fØIl] iSfFkd ykjsal o ,-ch- vysDtsUMj lafo/kku lHkk dk xBu

Ø 1947 bZ- dk Hkkjr Lora=rk vf/kfu;e & 4 tqykbZ 1947 dks izLrqr] 18 tqykbZ dks ikfjr rRdkyhu fczfV'k iz/kkuea=h ^DyhesaV ,Vyh^ FksA

Hkkjrh; lafo/kku lHkk % xBu & tqykbZ 1946] izFke cSBd & 9 fnlacj 1946

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4- izkarh; lafo/kku lfefr & ljnkj oYyHk HkkbZ iVsy

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6- >.Mk lfefr & ts-ch- d`iykuh

7- la?k&jkT; lfefr & ia- usg:

Ø lafo/kku fuekZ.k dh izfØ;k esa 2 o"kZ] 11 eghuk vkSj 18 fnu yxsA

Ø lafo/kku dks 26 uoEcj 1946 bZ- dks lafo/kku lHkk }kjk ikfjr fd;k x;k ¼26 uoEcj dks jk"Vªh; fof/k fnol euk;k tkrk gSA½ rc blesa dqy 22 Hkkx 395 vuqPNsn vkSj 8 vuqlwfp;k¡ FkhA orZeku esa 25 Hkkx] 395 vuqPNsn ,oa 12 vuqlwfp;k¡ gSaA

Ø lafo/kku dh vafre cSBd 24 tuojh 1950 bZ- dks gqbZ mlh fnu lafo/kku lHkk ds }kjk MkW- jktsUnz izlkn dks Hkkjr dk izFke jk"Vªifr pquk x;kA 26 tuojh 1950 dks lafo/kku iwjh rjg ykxw fd;k x;kA

__________

सोमवार, 13 फ़रवरी 2012

सीसेट क्या है ? कैसे करें इसकी तैयारी ?

संघ लोक सेवा आयोग के बाद मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग भी राज्य सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा में वैकल्पिक विषय  की जगह  अब  सीसेट ( सिविल सर्विस एप्तित्युट  टेस्ट ) लेन जा रही है . सीसेट के बारे में लोगो द्वारा कहा जा रहा है , कि इसमें मैथ्स रीजनिंग  या बैंकिंग अभियोग्यता आनी है. तो ये बात सरासर गलत है . इसका प्रमाण पिछली बार कि संघ लोक सेवा कि परीक्षा है . 
सवाल ये उठता है , कि आखिर क्यों संघ लोक सेवा आयोग और राज्य सेवा आयोग ये परिवर्तन करने जा रहा है ? तो इस परीक्षा प्रारूप का मुख्या उद्देश्य अभ्यर्थी की सिविल सेवा के लिए उपयुक्त अभियोग्यता की जाँच करना है . तथा अति महत्पूर्ण पदों के लिए सुयोग्य उमीदवार का चयन करना है .
सिविल सेवा में वर्षो से चली आ रही प्रारंभिक परीक्षा के द्वितीय प्रश्न पत्र में विभिन्न वैकल्पिक विषयों से प्रश्न पूछे जाते थे . जिनका सिविल सेवा की कार्यप्रणाली और आम जनता से कुछ भी लेना देना नही होता था . कोई भी अभ्यर्थी इन विषयों को रट कर अच्छे अंक प्राप्त कर सकता था . ऐसी स्तिथि में अभ्यर्थी की किसी विशेष विषय सम्बन्धी ज्ञान का तो पता चल जाता था , परन्तु ये पता नही चल पाता था , कि वह सिविल सेवा के योग्य है या नही . अच्छे अंक प्राप्त करने के कारन आयोग कि उस अभ्यर्थी को चुनने की बाध्यता हो जाती  थी . अतः अब सीसेट के माध्यम से विषय वस्तुओ को रटने की प्रवत्ति को घटा कर सही अभियोग्यता को पहचानना है .
सीसेट के अंतर्गत निम्न विषय होंगे -
-सामान्य मानसिक योग्यता 
-आधारभूत गणना
-तार्किक  योग्यता एवं विश्लेष्णात्मक योग्यता
-निर्णयन एवं समस्यायों का समाधान 
-समंको की व्याख्या एवं पर्याप्तता 

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

टॉपर्स की कलम से : सफलता कैसे पाए .


मित्रो ,
सफलता की परिभाषा हर व्यक्ति के हिसाब से अलग होती है । अब अगर आप को अपनी सफलता को निर्धारित करना है तो सबसे पहले अपना लक्ष्य निर्धारित करना होगा । जब तक आपका लक्ष्य निर्धारित न हो जाये तब तक किसी भी व्यक्ति की राह बिना पतवार की नाव की तरह होती है । लक्ष्य निर्धारित करने के लिए सबसे जरुरी है की आपका रुझान क्या है ? आप किस क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते है ? अगर यह निश्चित हो गया तो अपने लक्ष्य के लिए सही और सार्थक मार्गदर्शन खोजिये जो आपको सही दिशा में आपकी मंजिल तक पहुचने का रास्ता बता सके ।
सफलता प्राप्ति के लिए कड़ी म्हणत का कोई विकल्प नही है । मगर मेहनत सही दिशा में और सार्थक होनी चाहिए , क्योंकि आप अगर गलत दिशा में मेहनत कर रहे है , तो इसका मतलब है , जैसे आप दीवार में चाहे कितना भी जोर लगा लो आप दीवार को बिलकुल भी नही हिला सकते है ।
डॉ ० चन्द्र प्रकाश पटेल
(म० प्र० लोक सेवा आयोग परीक्षा २००९ में डिप्टी कलेक्टर पद पर चयनित )
क्रमशः ............

शनिवार, 28 जनवरी 2012

विश्व के वर्तमान महत्वपूर्ण अधिकारी

संयुक्त राष्ट्र महसचिव - बान की मून ( द० कोरिया )
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी - युकिया अमानो ( जापान )
यूनेस्को प्रमुख - इरिना वीकोवा
अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक कोष - क्रिश्तीना लोगार्ड ( फ़्रांस )
विश्व बैंक प्रमुख - राबर्ट जोएलिक
विश्व व्यापार संगठन - पास्कल लामी
यूनिसेफ प्रमुख - एंटनी लेक
इंटरपोल प्रमुख - रोनाल्ड के० नोबल
अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति - जेक्स रोगे
फीफा प्रमुख - सेप ब्लाटर
एशियन क्रिकेट समिति - मुस्तफा कमाल (पकिस्तान )
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् - शरद पवार

भारत के वर्तमान महत्वपूर्ण पदाधिकारी

भारत के मुख्य न्यायाधीश - न्यायमूर्ति एच ० एस० कपाडिया
महान्यायवादी - गुलाम ई० वाहनवती
महाधिवक्ता - रोहिंटन नरीमन
राज्यसभा के सभापति - हामिद अंसारी
राज्यसभा के उप सभापति - के० रहमान
लोकसभा अध्यक्ष - मीरा कुमार
लोकसभा उपाध्यक्ष - करिया मुंडा
राष्ट्रिय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष - वजाहत हबीबुल्लाह
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष - डॉ रामेश्वर ओरांव
राष्ट्रिय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष - पी० एल ० पुनिया
राष्ट्रिय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष- एम० एन० राव
राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष- के ० जी० बालकृष्णन (कार्यवाहक )
राष्ट्रिय महिला आयोग - ममता शर्मा
परमाणु ऊर्जा आयोग - श्री कुमार बनर्जी
रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया - दी० सुब्बाराव
राष्ट्रिय जांच एजेंसी - एस० के ० सिन्हा
इंटेलिजेंस ब्यूरो - नेह्चल संधू
इसरो - के० राधाकृष्णन
रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रा ) - एस० के० त्रिपाठी
मुख्य सूचना आयुक्त - सत्यानन्द मिश्र
मुख्य चुनाव आयुक्त - शाहबुद्दीन याकूब कुरैशी
राष्ट्रिय सुरक्षा गार्ड - आर० के० मेधेकर

गुरुवार, 26 जनवरी 2012

१५ अगस्त से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है २६ जनवरी



आप सभी को देश के ६३ वे गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाये ।
जैसा कि सबको पता है कि २६ जनवरी १९५० को हमारे संविधान को लागू किये जाने के कारन हम सभी भारतवासी इस दिन को गणतंत्र दिवस के रूप में मानते है । वैसे हमरा देश पंद्रह अगस्त १९४७ को आज़ाद हुआ था , लेकिन पंद्रह अगस्त से भी ज्यादा धूम धाम से छब्बीस जनवरी मनई जाती है । तो मन में प्रश्न उठता है ऐसा क्यूँ ?
तो आपकी जानकारी के लिए बता दू , कि भले ही हम पंद्रह अगस्त १९४७ को वैधानिक तौर से आज़ाद हुए हो , मगर संवैधानिक तौर से तो २६ जनवरी १९५० को ही आज़ाद हुए । मतलब इस दिन के पहले हमारे पास न तो अपना संविधान था , न ही अपना गणतंत्र , न अपने कानून , न नागरिकता , न विधायिका और न ही कार्यपालिका- न्यायपालिका । हमारा देश अंग्रेजो के बनाये भारत शासन अधिनियम १९३५ से संचालित था ।
९ दिसंबर १९४६ को हमरी संविधान सभा का गठन हुआ ।
जिसके अस्थायी अध्यक्ष डॉ सच्चिदानंद सिन्हा बनाये गये थे ।
फिर ११ दिसंबर १९४६ को डॉ राजेंद्र प्रसाद स्थायी अध्यक्ष बने ।
२ वर्ष १८ माह और ११ दिन के अथक परिश्रम के बाद २६ नवम्बर १९४९ को दुनिया का सबसे बड़ा संविधान तैयार हुआ ।
हमारे देश के संविधान निर्माताओ ने समय कि कमी के कारण दुनिया के अच्छे संविधानो से अच्छी बातो को लेकर इसे तैयार किया था , खैर इस पर ब्रिटेन , अमेरिका, जापान , रूस , जर्मनी , फ़्रांस , द० अफ्रीका , आस्ट्रेलिया , कनाडा आदि का अधिक प्रभाव रहा ।
संविधान सभा कि प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ भीम राव आंबेडकर थे ।
कोग्रेस द्वारा २६ जनवरी १९३० में मनाये गये स्वतंत्रता दिवस कि याद को अक्षुण बनाये रखने के लिए इसे तैयार होने के दो माह बाद २६ जनवरी १९५० को लागू कर दिया गया ।

शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

कैसे भगाए परीक्षा का भूत .!!


कई परीक्षार्थियों को परीक्षा के बारे में सोचकर ही बैचैनी महसूस होने लगती है । दिमाग में उथल-पुथल मच जाती है , कि क्या मैं सभी प्रश्नों के उत्तर दे पाऊंगा ? क्या सभी उत्तर सही होंगे ? जो मैंने सिलाबुस छोड़ दिया कहीं उसी में से प्रश्न आ गये तो ? थोडा और पढ़ लेता तो ठीक रहता ! परीक्षा के लिए तोडा और समय मिल गया होता तो अच्छा रहता ! इस तरह के न जाने कितने प्रश्न लगभग सभी विद्यार्थियों को परेशां करते है । थोडा - बहुत मानसिक दवाब बेहतर प्रदर्शन के लिए अच्छा रहता है मगर ज्यादा दवाब नुकसानदायक हो सकता है । यह व्यक्ति के चारो तरफ एक नकारात्मक घेरा बना देता है , और फिर विद्यार्थी मन लगाकर ठीक से नही पढ़ पाता है । और परीक्षा में न तो ठीक से प्रश्नों के उत्तर दे पाता है और न ही सटीक उत्तर दे पाता है ।
इस तरह के भय को दूर करने कुछ उपाय है :-

सबसे पहले तो समय रहते ही अपना कौर्स पहले पूरा कर ले और उसका रिवीजन भी करले । ताकि एन वक़्त पर व्यर्थ का तनाव न हो । पढ़ते समय छोटे छोटे ब्रेक लेते रहे , ताकि दिमाग रिफ्रेश होता रहे। ब्रेक चाहे संगीत सुनकर ले सकते है , थोडा टहल सकते है , कुछ खा सकते है , स्नान कर सकते है , किसी अच्छे मित्र से फोन पर बात कर सकते है । ऐसा ही कोई एक तरीका चुन सकते है ।
परीक्षा के एकाध दिन पहले अपना प्रवेश पत्र, पेन आदि अच्छे से चेक कर ले

परीक्षा केंद्र कि पूरी जानकारी जुटा ले , हो सके तो १ दिन पहले जाकर देख आये

परीक्षा पूर्व रात को पूरी नींद ले ।

परीक्षा कक्ष समय से कुछ पहले ही पहुचे ।

प्रश्नपत्र मिलने के पूर्व गहरी साँस ले और छोड़े , अपनी पीठ बिलकुल सीधी रखे ।
मन में कोई सकरात्मक बार दोहराए , जैसे - मैं ये इम्तिहान पास करने वाला है !
प्रश्नों को ध्यान से पढ़े फिर उत्तर दे , जो प्रश्न सरल हो उन्हें पहले फिर कठिन प्रश्नों को करें ।

समय का विशेष ध्यान रखे , प्रश्न पत्र में दिए निर्देशों को भी ध्यान रखे ।

बुधवार, 11 जनवरी 2012

समसामयिक घटनाएं


# ६ जून को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में "सुरक्षा मामलो पर मंत्रिमंडलीय समिति " ने सैधांतिक रूप से राष्ट्रिय आसूचना ग्रिड परियोजना को मंजूरी प्रदान की । इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश में आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों तथा कानून लागू करने वाली एजेंसियों के बीच ठोस सूचनाओ का आदान प्रदान करना है ।
# सरकार ने काले धन का पता लगाने और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कार्यवाई के लिए एक नया अपराधिक जांच निदेशालय का गठन किया है । इस विशेष शाखा जो नई दिल्ली में होगी की अध्यक्षता आयकर के महानिदेशक करेंगे । इसके आठ अन्य मुख्यालय - दील्ली, चंडीगढ़ , जयपुर , अहमदाबाद , मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और लखनऊ में होंगे ।
# अपराधिक मामलो में जल्द ही न्याय उपलप्ध करने के लिए 'न्याय प्रदान एवं कानून सुधर राष्ट्रिय मिशन ' को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है ।
असम में सक्रीय संगठित उग्रवादी संगठन ' यूनाईटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ़ असम ' (उल्फा ) ने १२ जुलाई २०११ को एकपक्षीय संघर्ष विराम की घोषणा की । (उल्फा का गठन १९७२ में हुआ था )।
कोलकाता उच्च न्यायलय के न्यायधीश न्यायमूर्ति सौमित्र सेन सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति की जाँच में दोषी पाए गये , इन पर संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था , इससे पूर्व ही इन्होने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था । यदि न्यायमूर्ति सेन पर महाभियोग पारित हो जाता तो ये भारतीय इतिहास के प्रथम व्यक्ति होते जिन पर महाभियोग पारित होता ।
प्रथक तेलंगाना राज्य मामले पर श्री कृष्ण आयोग का गठन किया गया था । ३० दिसंबर २०१० को रिपोर्ट सौंपी ।
# २४ अप्रैल को पंचायती राज दिवस घोषित किया गया है , क्योंकि २४ अप्रैल १९९३ को ७३ व संविधान संशोधन के साथ देश में पंचायती राज लागु हुआ था ।

सोमवार, 9 जनवरी 2012

जब पढने में मन न लगे तो क्या करे .



दोस्तो ,
अकसर प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के सामने यह समस्या आती है ,कि पढाई में मन नही लगता है । मगर पढना प्रतियोगी परीक्षा के लिए बहुत जरुरी है । तो मेरे अनुभव और विचार से तो सबसे पहले पढाई में मन न लगने के कारन का पता लगाना चाहिए कि आखिर पढाई में मन क्यों नही लग रहा है ?
मेरे विचार से कुछ सामान्य कारण ये हो सकते है :-
१- पढाई का उपयुक्त माहौल का न होना ।
२- पढने का उचित समय का न होना ।
३- पढने के लिए उपयुक्त सामग्री का न होना ।
४- उचित मार्गदर्शन का न होना ।
५-
अन्य कार्यो से व्यवधान ।
६- एकाग्रता की कमी होना ।
७- दृढ निश्चय का अभाव।
मेरे ख्याल से उपरोक्त सामान्य कारणों से सामान्यतः प्रतियोगी पढ़ नही पाते है , इनके अलावा भी कुछ अन्य विशेष कारण हो सकते है , जो अलग अलग लोगो के लिए अलग हो सकते है । आज हम इन्ही सामान्य कारणों की चर्चा करते है । इन कारणों में सबसे महत्वपूर्ण कारण जो है , वो है उचित मार्गदर्शन का न होना । उचित मार्गदर्शन का प्रतियोगी परीक्षाओ में अति महत्वपूर्ण स्थान है । जैसे आपको अगर दिल्ली जाना है , और आपको सही रास्ता मालूम नही , अगर आपको सही मार्गदर्शक नही मिला तो हो सकता है , कि आप किसी तरह से दिल्ली पहुच भी जाये मगर इसमें आपका बहुत सारा समय और धन खर्च हो सकता है । मगर सही मार्गदर्शक मिलने पर आप समय के साथ धन भी बचा सकते है , और अपनी मंजिल पर सही वक़्त पर पहुच सकते है । अतः सही ढंग से तैयारी शुरू करने के लिए एक उपयुक्त मार्गदर्शक अतिआवश्यक है । कई बार हम मेहनत और प्रयास तो बहुत करते है मगर सफलता नही मिलती है , दूसरी तरफ कुछ लोग कम मेहनत और कुछ प्रयास में ही सफल हो जाते है । इसका कारण उनका सही दिशा में सार्थक प्रयास होता है । जैसे - अगर हम कील को उल्टा पकड़कर कितनी भी जोर से दीवार में ठोंके वह नही ठुक सकती है , वही उसे सीधा कर देने पर वह थोड़े प्रयास से ही आराम से ठुक जाएगी । इसी तरह प्रतियोगी परीक्षा में सही दिशा में सही प्रयास बहुत जरुरी है ।
अब हम मूल मुद्दे पर आते है , कि कैसे हम पढाई में मन लगाये : -
सबसे पहले तो पढने के लिए एक लक्ष्य या उद्देश्य होना जरुरी है , यह हमारे लिए प्रेरक का कार्य करता है । अगर लक्ष्य विहीन है ,तो हमारी सफलता शंकास्पद होगी । अतः एक लक्ष्य होना अति आवश्यक है । एक से अधिक लक्ष्य होने से मन अधिक भटकता है और पढाई में मन नही लगता है ।
अब लक्ष्य निर्धारण के बाद समुचित तैयारी जरुरी है , अर्थात हमें अपने लक्ष्य के बारे में पूरी जानकारी जुटानी होगी , कि परीक्षा कैसे होगी ?
सिलेबस क्या है ?
पैटर्न किस तरह का है ?
प्रश्न किस तरह के आते है ?
पाठ्य सामग्री कहाँ से , कैसे मिलेगी ?
तैयारी की रणनीति क्या होगी ?
सफलता के लिए कितनी मेहनत जरुरी है ?
सफल लोगो की क्या रणनीति रही थी ? इत्यादि
अगर हम इन प्रश्नों के उत्तर प्राप्त कर लेते है तो , हमारी समास्या का आधा समाधान हो जायेगा । अब आधे समाधान के लिए हमें अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करना होगा । मतलब सेल्फ मेनेजमेंट
यदि हम खुद को सही तरीके से प्रतियोगिता के हिसाब से नही ढाल पाते है, तो सफलता में संदिग्धता होगी । हमें अपनी पढाई का समय और घंटे अपनी क्षमता के अनुसार निर्धारित करने होंगे । और निर्धारित समय सरणी का द्रढ़ता के साथ पालन करना होगा । इसके लिए हम प्रेरक व्यक्तिवो , प्रेरक प्रसंगों, प्रेरक पुस्तकों आदि का सहर ले सकते है ।
पढाई करते समय ध्यान देने योग्य बाते :-
१ - पढाई हमेशा कुर्सी-टेबल पर बैठ कर ही करें , बिस्तर पर लेट कर बिलकुल भी न पढ़े । लेटकर पढने से पढ़ा हुआ दिमाग में बिलकुल नही जाता , बल्कि नींद आने लगती है ।
२ - पढ़ते समय टेलीविजन न चलाये और रेडियो या गाने भी बंद रखे ।
३ - पढाई के समय मोबाइल स्विच ऑफ़ करदे या साईलेंट मोड में रखे ," मोबाइल पढाई का शत्रु है "
४ - पढ़े हुए पाठ्य को लिखते भी जाये इससे आपकी एकाग्रता भी बनी रहेगी और भविष्य के लिए नोट्स भी बन जायेंगे ।
५- कोई भी पाठ्य कम से तीन बार जरुर पढ़े ।
६ - रटने की प्रवृत्ति से बचे , जो भी पढ़े उस पर विचार मंथन जरुर करें ।
७ - शार्ट नोट्स जरुर बनाये ताकि वे परीक्षा के समय काम आये ।
८- पढ़े हुए पाठ्य पर विचार -विमर्श अपने मित्रो से जरुर करें , ग्रुप डिस्कशन पढाई में लाभदायक होता है।
९ - पुराने प्रश्न पत्रों के आधार पर महत्वपूर्ण टोपिक को छांट ले और उन्हें अच्छे से तैयार करें ।
१० - संतुलित भोजन करें क्योंकि ज्यादा भोजन से नींद और आलस्य आता है , जबकि कब भोजन से पढने में मन नही लगता है ,और थकावट, सिरदर्द आदि समस्याएं होती है ।
११- चित्रों , मानचित्रो , ग्राफ , रेखाचित्रो आदि की मदद से पढ़े । ये अधिक समय तक याद रहते है ।
१२- पढाई में कंप्यूटर या इन्टरनेट की मदद ले सकते है ।
इस तरह से
आप पढाई में मन लगा सकते है , अगर फिर भी पढाई में मन नही लगता तो आप टिपण्णी में अपनी समस्या लिख सकते है । आपकी सफलता की कामना के साथ आपका
मुकेश पाण्डेय
लक्ष्य परिवार

शनिवार, 7 जनवरी 2012

भारत : कुछ महत्वपूर्ण तथ्य




जनसँख्या : १,२१,०१,९३४२२ (२०११ की जनगणना के अनुसार )
: विश्व में दूसरा सर्वाधिक जनसँख्या , विश्वा की कुल जनसँख्या का १७.५ %
: कुल जनसँख्या में ८०.५% हिन्दू, १३.४ % मुस्लिम , अन्य वर्ग है
साक्षरता : ७४.०४% (पुरुष- ८२.१४%, महिला- ६५.४६%)
: सर्वाधिक साक्षर राज्य - केरल , न्यूनतम साक्षर राज्य- बिहार
जनसँख्या घनत्व : ३८२ व्यक्ति प्रति वर्ग किलो मीटर (सर्वाधिक - बिहार में )
लिंगानुपात : ९४० महिलाएं प्रति हज़ार पुरुषो पर
# मानव विकास सूचकांक
में भारत की १३४ वी रेंक है ।
(राज्यों में केरल सबसे ऊपर और छत्तीसगढ़ सबसे नीचे है )
# रिश्वतखोरी सूचकांक में भारत की 19 वी रेंक है ।
# भ्रष्टाचार
सूचकांक में भारत की 95 रेंक है ।
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भारत के राष्ट्रीय प्रतीक :-

राष्ट्रीय दिवस - २६ जनवरी, १५ अगस्त, २ अक्तूबर
राष्ट्रीय वृक्ष - बरगद
राष्ट्रीय पुष्प- कमल
राष्ट्रीय फल - आम
राष्ट्रीय पशु - बाघ\शेर
राष्ट्रीय पक्षी - मोर
राष्ट्रीय जलीय जीव- गंगातिक डोल्फिन
राष्ट्रीय धरोहर जीव - हाथी
राष्ट्रीय नदी - गंगा
राष्ट्रीय खेल - हाकी
राष्ट्रीय आदर्श वाक्य- सत्यमेव जयते
राष्ट्रीय गान- जन गन मन .....
राष्ट्रीय गीत - वन्दे मातरम
राष्ट्रीय कैलेण्डर- शक संवत

मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

बहु वैकल्पिक प्रश्न पत्र वाली परीक्षाओं में कैसे करे हल प्रश्नपत्र ...






आज
सामान्यतः सभी प्रतियोगी परीक्षाएं बहु वैकल्पिक प्रश्नों वाली होने लगी है ।
इन परीक्षाओं में सफलता के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए :-
१- सबसे पहले पूरे प्रश्नपत्र को ध्यान से पढना चाहिए और साथ ही जो प्रश्न हमें एक बार ही पढ़ते ही बन रहे है उनके सही जवाब के निचे प्रश्न पत्र में ही हलके से टिक लगा देना चाहिए ।

२- इसके बाद जब हम पूरा प्रश्नपत्र पढ़ ले तो अब टिक लगे जवाबो को फिर उत्तर पुस्तिका में अंकित कर देना चाहिए ।
३- सरल या वे प्रश्न जो हमें एक ही बार में बन गये उनके बाद हमें ऐसे प्रश्न देखने चाहिए , जिनके जवाब थोड़े अधिक प्रयास से बन जाये ।

३- सबसे बाद में हमें वो प्रश्न करने चाहिए जिनमे हमें सबसे ज्यादा परेशानी है या नही बन रहे है ।

४- यदि ऋणात्मक मूल्याङ्कन नही है , तो हमें सभी प्रश्नों के जवाब अनिवार्य रूप से देना चाहिए चाहे उत्तर हमसे बने अथवा न बने ।

अगर हम इन छोटी - छोटी बातों को ध्यान में रखे तो हमारी गलतियों की सम्भावनाये न्यूनतम हो सकती है , जो प्रश्न हमसे बन रहे है , समय आभाव में छूटेंगे नही । सफलता तब ज्यादा नजदीक आ जाएगी ।
यदि आप की भी कोई प्रतियोगी परीक्षाओ सम्बन्धी कोई समस्या है , तो निचे टिपण्णी में उसे जरुर दर्ज करें , हमें आपकी सहायता करने में ख़ुशी होगी ।
आपकी सफलता की कामना के साथ आपका
मुकेश पाण्डेय "चन्दन "

रविवार, 13 नवंबर 2011

समसामयिकी २०११ : नवीन तथ्य

चर्चित व्यक्तिव

बंगारी
मथाई

केन्याई पर्यावरण विद और नोबल शांति पुरस्कार(2004) विजेता का कैंसर के कारण ७१ वर्ष की आयु में निधन हो गया । इन्होने १९७७ में केन्या में ग्रीन बेल्ट आन्दोलन की स्थापना कर के पिछले तीन दसको में करोडो पेड़ लगवाए और महिलाओ को वानिकी के माध्यम से रोजगार दिलाया ।
स्टीव जोब्स
कंप्यूटर का इस्तेमाल सुगम और सहज बनाने वाले अप्पाल कंपनी के सह संस्थापक जोब्स का निधन ६ अक्तूबर को ५६ वर्ष की आयु में लीवर कैंसर से हो गया । आईपोड और अईफोने भी जोब्स की देन है।

मंसूर अली खान ( नवाब पटौदी )
भारतीय टेस्ट क्रिकेट टीम के सबसे युवा(२१ वर्ष की उम्र में ) , तेज तर्रार और दूरदर्शी कप्तान का निधन हो गया । पटौदी अपने पीछे पत्नी - शर्मीला टैगोर , पुत्र- सैफ अली खान , पुत्री- सोहा अली खान को छोड़ गये है ।
न्यायमूर्ति मार्कंडेय काटजू

सुप्रीम कौर्ट के
न्यायधीश मार्कंडेय काटजू सेवा निवृत हो गये । वे स्वतंत्रता सेनानी कैलाश नाथ काटजू (पूर्व मुख्य मुख्य मंत्री मध्य प्रदेश ) के पौत्र है। उन्हें प्रेस ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया (पी टी आई ) का अध्यक्ष बनाया गया है ।

न्यायमूर्ति सौमित्र सेन
कोलकाता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सौमित्र सेन द्वारा पद से त्याग पत्र देने के बाद लोक सभा में उनके विरुद्ध चल रहे महाभियोग प्रस्ताव पर चर्चा रोक दी गयी । सौमित्र सेन के विरुद्ध राज्य सभा में महाभियोग पारित हो गया था , ये स्वतंत्र भारत की पहली घटना है ।

कर्नल मुअम्मर गद्दाफी

लीबिया के तानाशाह शासक कर्नल गद्दाफी को अमेरिका ने अपनी सैन्य कार्यवाही में मार गिराया । लीबिया की राजधानी त्रिपोली है । १९५१ में इसे स्वतंत्रतता मिली , १९५९ में गणतंत्र बना ।
लीबिया का राष्ट्रिय ध्वज विश्व का एकमात्र ऐसा ध्वज है, जिसमे केवल एक रंग है । इसमें न तो कोई आकृति है और न ही कुछ और बना है ।

दलाई लामा
तिब्बतियों की निर्वासित सरकार के राजनैतिक प्रमुख तथा तिब्बतियों के धर्म गुरु दलाई लामा ( तेनजिंग ग्यात्सो )ने पिछले दिनों अपने पूरे राजनैतिक अधिकार त्याग दिए । १९४९ में चीन ने तिब्बत पर अधिकार कर लिया था , तबसे तिब्बती भारत में शरणार्थी के रूप में रह रहे है ।



रविवार, 30 अक्टूबर 2011

सफलता आसानी से नही मिलती है ....१


मित्रो , सफलता शब्द हर किसी को बहुत लुभाता है , हर कोई सफलता पाना चाहता है , मगर सफलता हर किसी को नसीब नही होती है । दुनिया में सफल लोगो का प्रतिशत जरा कम है । ऐसा क्यों ?
सबसे पहले तो हमें ये निर्धारित करना होगा कि हमरी सफलता क्या होनी चाहिए ....मतलब हमें अपना लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए । सामान्यतः होता ये है ,कि लोग अपने जीवन में कोई एक लक्ष्य ही निर्धारित नही कर पाते है । जब आपकी मंजिल ही निश्चित नही है , तो आप उस तक पहुचोगे कैसे ? तो सफलता पाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है , लक्ष्य निर्धारित करना ।
अब सफलता के लिए जब हमने लक्ष्य निर्धारित कर लिया तो हमें अपने उस लक्ष्य के बारे में पूरी जानकारी , उस तक पहुचने का रास्ता खोजना होगा । मतलब रस्ते पर आगे बढ़ने से पहले देखना होगा कि रास्ता कितना लम्बा है , मंजिल कितनी दूर है , हमें किस दिशा में और किस ओर ,किस तरह से और कैसे जाना है । ये भी बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है । अक्सर लोग लक्ष्य तो निर्धारित कर लेते है , मगर सही तरीके से आगे नही बढ़ते , बात वही हुई ,कि हमें अपनी मंजिल का सही रास्ता मालूम नही और हम किसी भी दिशा में चल दे , तो जरुरी नही कि हम मंजिल तक सही वक़्त पर पहुचे । अतः लक्ष्य तक सफलता पूर्वक पहुचने के लिए सही पूर्वयोजना जरुरी है। ........ क्रमशः

गुरुवार, 13 अक्टूबर 2011

रीजनिंग की तैयारी कैसे करें .....



रीजनिंग या तर्कशक्ति के सवालो में प्रतियोगियों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है । जबकि रीजनिंग इतनी मुश्किल नही है जितना समझा जाता है । रीजनिंग के सवालो को हल करते समय केवल ट्रिक्स का ध्यान रखना ही महत्वपूर्ण नही है बल्कि स्वयं की समझ ज्यादा महत्वपूर्ण है । सबसे पहले हमें कुछ अच्छी स्तरीय पुस्तकों जैसे आर० एस० अग्रवाल आदि का अच्छी तरह से अध्ययन करना चाहिय ताकि जिन प्रश्नों को समझने में हमें बहुत समय लगता है , उन्हें कुछ ट्रिक्स के माध्यम से कुछ सेकंडो में हल किया जा सकता है ।



कुछ प्रश्नों के जवाब देते समय ग्राफ आदि का प्रयोग सवाल को काफी सरल बना देता है , जैसे - दिशा सम्बन्धी प्रश्न, रिश्तो पर आधारित प्रश्न , बैठक व्यवस्था पर आधारित प्रश्न आदि ।



अंग्रेजी वर्णमाला पर आधारित शब्दों को भी ट्रिक्स के माध्यम से हल जल्दी से किया जा सकता है ।



जैसे - अंग्रेजी के वर्णों का क्रम इ ज ओ टी -५ ,१०,१५, २०



इन प्रश्नों की ट्रिक्स के माध्यम से हम कोडिंग- डिकोडिंग के सवालो को भी हल कर सकते है । प्रत्येक अंग्रेजी के वर्ण को एक संख्या का क्रम दिया जाता है , जैसे - ऐ - को १, बी को २ से जेड को २६ तक



सांकेतिक भाषा के प्रश्नों को हल करते समय प्रत्येक अक्षर के विपरीत अक्षर की जरुरत पड़ती है । जिसे याद करना जरुरी होता है ।



shabd कोडिंग wale प्रशन में थोड़ी सी समझ की जरुरत पड़ती है । जैसे -



प्रश्न- यदि बदल को सफ़ेद ; सफ़ेद को हवा , हवा को नीला , नीले को पानी , पानी को बिजली खा जाये तो बताये पक्षी खान उड़ेंगे ?



हल- सामान्यतः पक्षी हवा में उड़ते है और इसमें हवा को नीला कहा गया है । अतः इसका उत्तर नीला होगा ।

क्रमशः......

मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

नवीनतम समसामयिकी २०११







चर्चित व्यक्तित्व :-





राहुल द्रविड़ - भारतीय क्रिकेट टीम में दीवार नाम से मशहूर इस बल्लेबाज ने एकदिवसीय क्रिकेट से सन्यास ले लिया है । राहुल ने ३४४ वनडे मैच में १२ शतक जमाएं है । उनका सर्वाधिक स्कोर १५३ रन है। वनडे क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने में राहुल विश्व में सांतवे स्थान पर है ।





लैला लोपेज :- अंगोला की लैला लोपेज ने मिस यूनिवर्स २०११ का ख़िताब जीता है ।





नोवाक जोकोविक :- दुनिया के नंबर एक टेनिस खिलाडी सर्बिया के नोवाक जोक्विक ने यूएस ओपन टेनिस का एकल ख़िताब जीतने के साथ ही इस साल तीसरी बड़ी प्रतियोगिता जीत ली है । इससे पहले उन्होंने आस्ट्रेलियन ओपन व विम्बलडन ख़िताब अपने नाम किये थे ।





रतन टाटा :- उद्योपति रतन टाटा का नाम दुनिया की दस मशहूर शख्सियतो की सूचि में ९ वे नंबर पर शामिल किया गया है । इस सूची में पहले नंबर पर द० अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला है।





मंसूर अली खान पटौदी :- नवाब पटौदी और टाईगर पटौदी के नाम से मशहूर महान क्रिकेट कप्तान का फेफड़े के संक्रमण के कारन निधन हो गया है । उन्होंने ४६ टेस्टों में से ४० में देश का नेतृत्व किया और ९ में जीत दिलाई थी । मात्र २१ वर्ष की उम्र में टीम की कप्तानी करने वाले वे विश्व के पहले कप्तान थे ।





शनिवार, 8 अक्टूबर 2011

राज्य सेवा मुख्य परीक्षा : किन बातो का ध्यान रखे .



लोक सेवा आयोग की सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा मुख्य परीक्षा ही होती है । इस परीक्षा में सबसे महत्वपूर्ण होता है , प्रश्न की मांग को समझनाप्रश्न से जुड़े विशिष्ट शब्दों जैसे - विवेचना करे, आलोचना करे , विश्लेषण करे, समीक्षा करे आदि को भी समझना चाहिए । क्योंकि ये शब्द ही उत्तर की रूपरेखा तय करते है । इनमे सूक्ष्म अंतर को समझना अति आवश्यक है ।






वर्णन /व्याख्या करें - विषय वस्तु के विभिन्न आयामों का क्रमबद्ध उल्लेख



विवेचन/विश्लेषण करें - विषय के विभिन्न पहलुओ की क्या, क्यों, कैसे आदि के आधार पर जांच- पड़ताल करना



समीक्षा/आलोचना करें - विषय की सम्पूर्ण जानकारी देते हुए उसके सकरात्मक पहलुओ को उद्घाटित करके ही उसके नकारात्मक पक्ष दिखाए । स्वयं के नियंत्रित सुझाव भी दिए जा सकते है ।



मूल्यांकन करें - विषय के महत्त्व का ध्यान रखते हुए अपनी राय स्पष्ट करें ।



महत्व बताएं - विषय की विशिष्टता को बताएं



स्पष्टीकरण - विषय के तथ्यों को सुलझाकर विषय को और अधिक खोलना ।



प्रासंगिकता - वर्तमान सन्दर्भ में विषय वस्तु का मूल्याङ्कन करना ।






मुख्य परीक्षा चूँकि लिखित होती है अतः इस परीक्षा में एक सतरीय लेखन शैली बहुत ही आवश्यक है । विषय की अच्छी तरह से अभिव्यक्ति होनी चाहिय । एक प्रभाव शाली उत्तर में सिर्फ विषय की तथ्यात्मक जानकारी ही पर्याप्त नही , बल्कि उसमे स्पष्टता ,विचारो की क्रमबद्धता, सम्बद्धता एवं विश्लेषण का प्रभाव आदि का होना अत्यंत आवश्यक है ।



उत्तर में भाषा यथासम्भव सरल - सहज होनी चाहिए



यथासंभव ग्राफ, मानचित्र, आरेख व् महत्वपूर्ण पंक्तियों को रेखंकित करने जैसे कार्य किये जाने चाहिए ।



प्रश्नों के उत्तर ' टू द प्वाइंट ' होने चाहिए ।



शब्द सीमा का पालन करना चाहिए।



उत्तर से समसामयिक घटनाओं के साथ जोड़कर भी दिखाया जाना चाहिए ।



क्रमशः ...









सोमवार, 3 अक्टूबर 2011

राज्य लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा की तैयारी कैसे करें.

राज्य लोक सेवा आयोग की त्रिस्तरीय परीक्षाओं में सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा मुख्य परीक्षा होती है , क्योंकि प्रारंभिक परीक्षा तो सिर्फ भीड़ कम करने का एक साधन है । इसके अंक भी कही नही जुड़ते है । लेकिन मुख्य परीक्षा में २१०० अंक होते है , जो चयन में अति महत्वपूर्ण होते है । इस परीक्षा में सात प्रश्न पत्र होते है ,जो लिखित होते है । इस परीक्षा में तैयारी प्रारंभिक परीक्षा से बिलकुल अलग होती है , जहा प्रारंभिक परीक्षा में हमें तथ्यात्मक तैयारी करनी होती है। वहीँ मुख्य परीक्षा में पूरी तैयारी अवधारणात्मक तरीके से करनी होती है । पाठ्यक्रम बहुत विस्तृत होता है , अतः चयन का आधार चयनात्मक तैयारी होती है । अर्थात अगर हम पुरे सिलेबस को तैयार करने बैठे तो हमारी तैयारी साधारण ही होगी , अतः हमे अति महत्वपूर्ण , महतवपूर्ण टोपिक को चुन कर उन्हें बहुत अच्छे तरीके से तैयार करना चाहिए । टोपिक चयन करने के लिए हमें सबसे पहले पुराने प्रशन पत्रों को देखना होगा , प्रश्नों की प्रकृति को समझाना होगा , किस टोपिक से ज्यादा प्रश्न आते है , ये समझना होगा .....................क्रमशः ........

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

संविदा शिक्षक पात्रता परीक्षा की तैयारी कैसे करें













हाल
ही में मध्य प्रदेश शासन की घोषणा " शिक्षको के ९६ हजार पद " के अंतर्गत व्यापम ने तीनो वर्गों के लिए लगभग ८१,५०० पदों के लिए विज्ञापन जारी किये है । इसकी पूरी जानकारी व्यापम ने अपनी वेबसाइट पर दी है । इस बार की पात्रता परीक्षा पिछली बार से थोड़ी अलग है , क्योंकि इस बार का वर्ग १ और २ का सिलेबस व्यापम ने सी टी ऐ टी परीक्षा के आधार पर तय किया है । जो पिछली बार की तुलना में पूरी तरह से अलग है । इस बार वर्ग २ और ३ के सिलेबस में बी० एड ० और डी० एड ० के पाठ्यक्रम के अनुसार रखा है , जिसमे बाल विकास , शिक्षा शास्त्र , पर्यावरण अध्ययन , जैसे विषय जोड़े गये है । और पिछली बार की तैयारी इस बार बिलकुल काम नही आएगी क्योंकि पूरा सिलेबस बिलकुल अलग है। बाज़ार में भी जो पुस्तके आई है , अधिकांश पुराने पाठ्यक्रम के आधार पर है । इसलिए ये बहुत जरुरी है, कि आप जब पुस्तके ख़रीदे तो सिलेबस जरुर मिलाये ।
इस बार वर्ग २ और ३ के सिलेबस में सामान्य ज्ञान बिलकुल भी नही है। इसलिए वर्ग २ और ३ के लिए सामान्य ज्ञान पढने में अपना समय बर्बाद न करे ।
वर्ग १ के लिए इस बार सामान्य ज्ञान से ज्यादा आपको अपने विषय पर ध्यान देना होगा । क्योंकि इस बार वर्ग १ में मात्र ५० अंक का सामान्य ज्ञान जिसमे हिंदी- अंग्रेजी भी शामिल है , आना है । विषय के १०० अंक के प्रश्न आने है । इस बार चयन का पूरा आधार वर्ग में विषय ही होगा ।

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

क्या पढना चाहिए से ज्यादा महत्वपूर्ण है क्या नही पढना चाहिए !!!


अक्सर मुझसे बहुत से प्रतियोगी ये शिकायत करते है कि मैं पढता तो बहुत हूँ , मगर मुझे सफलता नही मिलती है ! ये एक बहुत ही आम परेशानी है , जो अक्सर प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करने वाले प्रतियोगियों के साथ आती है । एक बात यहाँ मैं ये कहना चाहूँगा कि बहुत ज्यादा पढने से कभी सफलता नही मिलती है । बल्कि हम कम पढ़े लेकिन वो महत्पूर्ण और सही होना चाहिए । अक्सर लोग गलती ये करते है कि वो पढ़ते तो बहुत है , लेकिन उसमे से बहुत कुछ उतना महत्वपूर्ण नहीं होता या परीक्षा के सिलेबस से ही बाहर का होता है । और हम कितना भी पढ़ ले मगर वो हमरे किसी काम का नही होता है ।
ये बात बिलकुल उसी तरह से है कि अगर एक आदमी दिवार में उलटी कील पकड़ कर उसे गाड़ने का भरपूर प्रयास कर रहा है , अब वो चाहे जितना प्रयास करे क्या वो कील को दीवार में गाड़ पायेगा ? नही न !!
इसी तरह अगर हम प्रतियोगी परीक्षाओ कि तैयारी करते समय अगर सही दिशा में प्रयास नही करेंगे तो हम कितनी भी मेहनत कर ले मगर हमें सफलता नही मिल सकती है । सफलता के लिए हमें सही दिशा में , सही समय पर , सही तरीके से परिश्रम करना होगा ।
अब प्रश्न उठता है कि हमें कैसे पता चले कि हम सही दिशा में है या गलत दिशा में ?
इस प्रश्न के जवाब के लिए हमें सबसे पहले परीक्षा के सिलेबस को समझना होगा , फिर हमें पुराने प्रश्न पत्रों कि सहायता से प्रश्नों कि रूप रेखा को समझना होगा कि किस तरह के प्रश्न पूछे जाते है ? किस तरह के प्रश्न अधिक आते है ?
जब
हम परीक्षा के प्रश्नों के स्वरुप को सही तरीके से समझ लेते है तो हमरा काम बहुत आसान हो जाता है । और अपने सिलेबस के उस भाग पर फ़ालतू मेहनत करने से बच जाते है जिससे बहुत कम प्रश्न आते है या आते ही नही है । इसके साथ हमें ये भी पता चल जाता है , कि सिलेबस के किस टोपिक से ज्यादा प्रश्न आते है । और किस तरह से प्रश्न आते है । और हम अपनी तैयारी उसी तरह से सही दिशा में करना शुरू कर सकते है ।
आपकी सफलता कि शुभ कामनाओ के साथ .........
आपका ही मुकेश पाण्डेय 'चन्दन'